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8 June 2016

संघर्ष ही जीवन है - Inspirational Post in Hindi

संघर्ष ही जीवन है - Inspirational Post in Hindi

Sanghrsh Hi Jeevan Hai - Prernadayk Post Hindi Me

inspirational-post-in-hindi-snagharsh

गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था।

उड़ते – उड़ते वे एक टापू पे पहुँच गए। वो जगह उनके लिए स्वर्ग के समान थी। हर तरफ खाने के लिए मेंढक, मछलियाँ और समुद्री जीव मौजूद थे और इससे भी बड़ी बात ये थी कि वहां इन गिद्धों का शिकार करने वाला कोई जंगली जानवर नहीं था और वे बिना किसी भय के वहां रह सकते थे।


युवा गिद्ध कुछ ज्यादा ही उत्साहित थे, उनमे से एक बोला, ” वाह ! मजा आ गया, अब तो मैं यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला, यहाँ तो बिना किसी मेहनत के ही हमें बैठे -बैठे खाने को मिल रहा है!”


बाकी गिद्ध भी उसकी हाँ में हाँ मिला ख़ुशी से झूमने लगे।


सबके दिन मौज -मस्ती में बीत रहे थे लेकिन झुण्ड का सबसे बूढ़ा गिद्ध इससे खुश नहीं था।



एक दिन अपनी चिंता जाहिर करते हुए वो बोला, ” भाइयों, हम गिद्ध हैं, हमें हमारी ऊँची उड़ान और अचूक वार करने की ताकत के लिए जाना जाता है। पर जबसे हम यहाँ आये हैं हर कोई आराम तलब हो गया है …ऊँची उड़ान तो दूर ज्यादातर गिद्ध तो कई महीनो से उड़े तक नहीं हैं…और आसानी से मिलने वाले भोजन की वजह से अब हम सब शिकार करना भी भूल रहे हैं … ये हमारे भविष्य के लिए अच्छा नहीं है …मैंने फैसला किया है कि मैं इस टापू को छोड़ वापस उन पुराने जंगलो में लौट जाऊँगा …अगर मेरे साथ कोई चलना चाहे तो चल सकता है !”


बूढ़े गिद्ध की बात सुन बाकी गिद्ध हंसने लगे। किसी ने उसे पागल कहा तो कोई उसे मूर्ख की उपाधि देने लगा। बेचारा बूढ़ा गिद्ध अकेले ही वापस लौट गया।


समय बीता, कुछ वर्षों बाद बूढ़े गिद्ध ने सोचा, ” ना जाने मैं अब कितने दिन जीवित रहूँ, क्यों न एक बार चल कर अपने पुराने साथियों से मिल लिया जाए!”


लम्बी यात्रा के बाद जब वो टापू पे पहुंचा तो वहां का दृश्य भयावह था।


ज्यादातर गिद्ध मारे जा चुके थे और जो बचे थे वे बुरी तरह घायल थे।


“ये कैसे हो गया ?”, बूढ़े गिद्ध ने पूछा।


कराहते हुए एक घायल गिद्ध बोला, “हमे क्षमा कीजियेगा, हमने आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया और आपका मजाक तक उड़ाया … दरअसल, आपके जाने के कुछ महीनो बाद एक बड़ी सी जहाज इस टापू पे आई …और चीतों का एक दल यहाँ छोड़ गयी। चीतों ने पहले तो हम पर हमला नहीं किया, पर जैसे ही उन्हें पता चला कि हम सब न ऊँचा उड़ सकते हैं और न अपने पंजो से हमला कर सकते हैं…उन्होंने हमे खाना शुरू कर दिया। अब हमारी आबादी खत्म होने की कगार पर है .. बस हम जैसे कुछ घायल गिद्ध ही ज़िंदा बचे हैं !”


बूढ़ा गिद्ध उन्हें देखकर बस अफ़सोस कर सकता था, वो वापस जंगलों की तरफ उड़ चला।


दोस्तों, अगर हम अपनी किसी शक्ति का use नहीं करते तो धीरे-धीरे हम उसे lose कर देते हैं।


For instance, अगर हम अपने brain का use नहीं करते तो उसकी sharpness घटती जाती है, अगर हम अपनी muscles का use नही करते तो

उनकी ताकत घट जाती है… इसी तरह अगर हम अपनी skills को polish नहीं करते तो हमारी काम करने की efficiency कम होती जाती है!


तेजी से बदलती इस दुनिया में हमें खुद को बदलाव के लिए तैयार रखना चाहिए। पर बहुत बार हम अपनी current job या business में इतने comfortable हो जाते हैं कि बदलाव के बारे में सोचते ही नहीं और अपने अन्दर कोई नयी skills add नहीं करते, अपनी knowledge बढ़ाने के लिए कोई किताब नहीं पढ़ते कोई training program नहीं attend करते, यहाँ तक की हम उन चीजों में भी dull हो जाते हैं जिनकी वजह से कभी हमे जाना जाता था और फिर जब market conditions change होती हैं और हमारी नौकरी या बिज़नेस पे आंच आती है तो हम हालात को दोष देने लगते हैं।


ऐसा मत करिए…अपनी काबिलियत, अपनी ताकत को जिंदा रखिये…अपने कौशल, अपने हुनर को और तराशिये…उसपे धूल मत जमने दीजिये…और जब आप ऐसा करेंगे तो बड़ी से बड़ी मुसीबत आने पर भी आप ऊँची उड़ान भर पायेंगे!

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16 May 2016

सुखों की परछाई - Motivational Story in Hindi

सुखों की परछाई - Motivational Story in Hindi


Sukhon-Ki-Parchhai-Hindi-Story-With-Moral

एक रानी अपने गले का हीरों का हार निकाल कर खूंटी पर टांगने वाली ही थी कि एक बाज आया और झपटा मारकर हार ले उड़ा.

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चमकते हीरे देखकर बाज ने सोचा कि खाने की कोई चीज हो. वह एक पेड़ पर जा बैठा और खाने की कोशिश करने लगा.

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हीरे तो कठोर होते हैं. उसने चोंच मारा तो दर्द से कराह उठा. उसे समझ में आ गया कि यह उसके काम की चीज नहीं. वह हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ उड़ गया.

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रानी को वह हार प्राणों सा प्यारा था. उसने राजा से कह दिया कि हार का तुरंत पता लगवाइए वरना वह खाना-पीना छोड़ देगी. राजा ने कहा कि दूसरा हार बनवा देगा लेकिन उसने जिद पकड़ ली कि उसे वही हार चाहिए.

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सब ढूंढने लगे पर किसी को हार मिला ही नहीं. रानी तो कोप भवन में चली गई थी. हारकर राजा ने यहां तक कह दिया कि जो भी वह हार खोज निकालेगा उसे वह आधे राज्य का अधिकारी बना देगा.

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अब तो होड़ लग गई. राजा के अधिकारी और प्रजा सब आधे राज्य के लालच में हार ढूंढने लगे.

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अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा. हार दिखाई दे रहा था, पर उसमें से बदबू आ रही थी लेकिन राज्य के लोभ में एक सिपाही कूद गया.

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बहुत हाथ-पांव मारा, पर हार नहीं मिला. फिर सेनापति ने देखा और वह भी कूद गया. दोनों को देख कुछ उत्साही प्रजा जन भी कूद गए. फिर मंत्री कूदा.

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इस तरह जितने नाले से बाहर थे उससे ज्यादा नाले के भीतर खड़े उसका मंथन कर रहे थे. लोग आते रहे और कूदते रहे लेकिन हार मिला किसी को नहीं.

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जैसे ही कोई नाले में कूदता वह हार दिखना बंद हो जाता. थककर वह बाहर आकर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता.

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आधे राज्य का लालच ऐसा कि बड़े-बड़े ज्ञानी, राजा के प्रधानमंत्री सब कूदने को तैयार बैठे थे. सब लड़ रहे थे कि पहले मैं नाले में कूदूंगा तो पहले मैं. अजीब सी होड़ थी.

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इतने में राजा को खबर लगी. राजा को भय हुआ कि आधा राज्य हाथ से निकल जाए, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें ? राजा भी कूद गया.

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एक संत गुजरे उधर से. उन्होंने राजा, प्रजा, मंत्री, सिपाही सबको कीचड़ में सना देखा तो चकित हुए.

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वह पूछ बैठे- क्या इस राज्य में नाले में कूदने की कोई परंपरा है ? लोगों ने सारी बात कह सुनाई.
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संत हंसने लगे, भाई ! किसी ने ऊपर भी देखा ? ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है. नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है. राजा बड़ा शर्मिंदा हुआ.


सीख. :-:-

हम सब भी उस राज्य के लोगों की तरह बर्ताव कर रहे हैं. हम जिस सांसारिक चीज में सुख-शांति और आनंद देखते हैं दरअसल वह उसी हार की तरह है जो क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है.

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हम भ्रम में रहते हैं कि यदि अमुक चीज मिल जाए तो जीवन बदल जाए, सब अच्छा हो जायेगा by . लेकिन यह सिलसिला तो अंतहीन है । सांसारिक चीजें संपूर्ण सुख दे ही नहीं सकतीं. सुख शांति हीरों का हार तो है लेकिन वह परमात्मा में लीन होने से मिलेगा. बाकी तो सब उसकी परछाई है.

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12 May 2016

Motivational Hindi Story - विश्वास की शक्ति !

Motivational Hindi Story - विश्वाश की शक्ति 

Prernadayk Hindi Kahani - Vishwas Ki Shakti
Power-of-Belief-Inspirational-Story-in-Hindi

किसी गांव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती थे, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं! कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।

एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।

खबर मिलते ही राम, महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला, “ महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”

महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- बेटा, तुम्हारी समस्या का समाधान इस चमत्कारी ताबीज में है, मैंने इसके अन्दर कुछ मन्त्र लिखकर डालें हैं जो तुम्हारी हर बाधा दूर कर देंगे। लेकिन इसे सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात शमशान में अकेले गुजारनी होगी।”
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8 May 2016

जीवन में दुखी रहने के कारण !

Reasons of Sadness in Life in Hindi !

Jeevan Me Dukhi Rahne Ke Kaaran Hindi Me!
Reasons-of-Sadness-in-Hindi

बोधिसत्व (बुद्धत्व पाने के लिए बोधिसत्व को 10 अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है. उस व्यक्ति को बोधिसत्व कहा जाता है. बोधिसत्व किसी व्यक्ति का नाम भी हो सकता है) का जन्म वाराणसी के बंजारों के यहां हुआ था. 

उस समय बंजारे जरूरत में आने वाली वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने और साथ ही सामान बेचने का काम करते थे.

एक दिन युवा बोधिसत्व को 500 बैल गाडिय़ों में सामान भरकर बेचने के लिए दूसरे शहर भेजा गया. 

तब उन्होंने अपने सभी साथियों को समझाते हुए कहा कि, यदि आप कोई भी ऐसी वस्तु देखो जो पहले न खाई हो, तो मुझसे पूछे बगैर मत खाना क्योंकि ऐसी वस्तुओं में लुटेरे विष भर देते हैं जिनको खाने से मृत्यु भी हो सकती है.

यह बात कहने के बाद कारवां चल पड़ा. वे सभी वन मार्ग से जा रहे थे. 

वहां गुंबिया नाम का एक यक्ष रहता था. 

जो मार्ग में इस तरह के भोज्य पदार्थों को सजा कर रखता था. जिसे खाने के बाद लोग बेहोश हो जाते थे और ज्यादा समय तक उपचार न मिले तो वे मर भी सकते थे. 

इतना समझाने के बाद बोधिसत्व के साथ चलने वाले कुछ साथियों ने असंयम के कारण उन फलों को खा लिया और वे बेहोश हो गए. 

जब काफी देर बाद वे दिखाई न दिए तो उनकी खोज की गई जहां वे अचेत पाए गए. बोधिसत्व ने उन्हें वमन (उल्टी) करवाया तब वे जीवित बच सके. इस तरह उन्हें नया जीवन मिला.

जीवन एक यात्रा है. यहां कई तरह के विषय भोग हैं, जिनमें तीक्ष्ण विष होता है. 

बुद्धिमान व्यक्ति महापुरुषों के अनुभवों से लाभ उठाते हैं और स्वयं पर नियंत्रण रखते हुए शांतिपूर्ण तरीके से जीवन यापन करते हैं. जो व्यक्ति यह आत्मसंयम छोड़ देता है वह इस संसार में दुख भोगता है.
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2 March 2016

जिन्दगी का मतलब - चलते रहना !

Life Means - Keep Moving - Most Inspirational Story In Hindi!

Life-Means-Keep-Moving-Most-Inspirational-Story-In-Hindi!

अर्जेंटिना के प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी मैसी ने एक बार कहा था कि रातों-रात सफल और विश्व का शानदार खिलाड़ी बनने के उन्होंने बचपन से ही यानी 17 साल दिन-रात मेहनत की थी.

सचिन तेंदुलकर ने बैट्समैन बनने के लिए बचपन से ही अपना पूरा समय क्रिकेट को देना शुरू कर दिया था. उनकी उपलब्धियां विशाल पर्वत की तरह हैं, जिस छूने में किसी को वर्षो लग सकते हैं.

इसी तरह 14 बार बिलियर्ड चैंपियन बने पंकज आडवानी भी वे मौन अचीवर हैं, जिन्होंने दुनिया की तड़क-भड़क और लाइमलाइट से दूर रह कर अपने काम पर केंद्रित और तनाव की स्थिति में शांत रहना सीखा. 

इस प्रतिस्पर्धी जगत में यदि आप उपलब्धियों के शिखर पर पहुंचना चाहते हैं, तो आपका तीन बातों पर ध्यान देना जरूरी है- 

पहली, यदि आप जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं, तो शुरू से ही उस पर ध्यान केंद्रित करना सीखें और व्यर्थ की गतिविधियों में समय न बर्बाद करें. बहुत कम उम्र में उस दिशा में मेहनत करने का लाभ यह होता है कि आप उसमें युवावस्था, यहां तक कि बचपन से पूरी ऊर्जा लगाते हैं.

दूसरी, सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचनेवाले लोगों ने कठोर मेहनत और काम के प्रति प्रतिबद्धता में विश्वास किया. सचिन तेंदुलकर जैसा विलक्षण स्वाभाविक हुनर होने के बावजूद उन्होंने अपनी काबिलियत को और निखारने के लिए कठोर मेहनत करना जारी रखा. 

तीसरी, जो लोग सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचे, वे कभी साधारण सफलता से संतुष्ट नहीं हुए
छोटी-मोटी सफलता से अपना ध्यान भंग किए बगैर लक्ष्य की ऊंचाइयों पर पहुंचने की कोशिश करते रहे. उनकी छोटी सफलता उनकी बाधक नहीं बनी और वे बड़ी सफलता के लिए निरंतर कोशिश करते रहे.

जहां विफलता लोगों को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने से रोकती है, वहीं यदि वे छोटी सफलता से संतुष्ट हो कर बैठ जाते हैं, तो सफलता भी ऊंचाइयों पर पहुंचने में बाधक बन जाती है. यदि लक्ष्य स्पष्ट नहीं है, तब भी लोग ऊंचाइयां नहीं छू पाते हैं.

जरुर पढ़ें :-


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5 February 2016

दौड़ - Inspirational Story In Hindi

दौड़ - Inspirational Story In Hindi


नमस्कार दोस्तों, जिन्दगी की भाग दौड़ में हम इतने व्यस्त हो जाते हैं की कभी सही से अपने आप को पहचान ही नहीं पाते और जब पहचानते हैं तब तक काफी देर हो चुकी होती है. इसी से सम्बंधित एक हिंदी कहानी जो हमें काफी पसंद आई आपलोगों के साथ Share कर रहा हूँ. आशा है आप भी इसे पसंद करेंगे और जीवन के एक गंभीर पहलु को समझ पाएंगे.

दौड़ - Inspirational Story In Hindi
दौड़ - Inspirational Story In Hindi

दौड़ - Inspirational Story In Hindi


एक दस वर्षीय लड़का रोज अपने पिता के साथ पास की पहाड़ी पर सैर को जाता था।


एक दिन लड़के ने कहा, “पिताजी चलिए आज हम दौड़ लगाते हैं, जो पहले चोटी पे लगी उस झंडी को छू लेगा वो रेस जीत जाएगा!”


पिताजी तैयार हो गए।
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29 January 2016

पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi.

पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi.

नमस्कार दोस्तों, आज पेश है "पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi." ये Hindi Story मानवीय गुण का व्याख्यान करता है तथा एक सच्चे इन्सान के Feelings को दर्शाता है. मुझे पूर्ण आशा है की आपको ये Hindi Story "पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi." बहुत पसंद आएगी.

पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi.
पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi.

पोस्टमैन - Inspirational Story in Hindi.


एक पोस्टमैन ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा, "चिट्ठी ले लीजिये."

अंदर से एक बालिका की आवाज आई, "आ रही हूँ."

लेकिन तीन-चार मिनट तक कोई न आया तो पोस्टमैन ने फिर कहा, "अरे भाई ! मकान में कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो."

लड़की की फिर आवाज आई,"पोस्टमैन साहब,दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए, मैं आ रही हूँ."

पोस्टमैन ने कहा, "नहीं, मैं खड़ा हूँ, रजिस्टर्ड चिट्ठी है, पावती पर तुम्हारे दस्तखत चाहिये."

करीबन छह-सात मिनट बाद दरवाजा खुला. पोस्टमैन इस देरी के लिए झल्लाया हुआ तो था ही और उस पर चिल्लाने वाला था ही, लेकिन दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया. सामने एक अपाहिज कन्या जिसके पांव नहीं थे, सामने खड़ी थी.

पोस्टमैन चुपचाप पत्र देकर और उसके दस्तखत लेकर चला गया.

हफ़्ते, दो हफ़्ते में जब कभी उस लड़की के लिए डाक आती, पोस्टमैन एक आवाज देता और जब तक वह कन्या न आती तब तक खड़ा रहता.

एक दिन उसने पोस्टमैन को नंगे पाँव देखा. दीपावली नजदीक आ रही थी. उसने सोचा पोस्टमैन को क्या ईनाम दूँ ?

एक दिन जब पोस्टमैन डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने, जहां मिट्टी में पोस्टमैन के पाँव के निशान बने थे, उन पर काग़ज़ रख कर उन पाँवों का चित्र उतार लिया. अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाई से उस नाप के जूते मंगवा लिये.

दीपावली आई और उसके अगले दिन पोस्टमैन ने गली के सब लोगों से तो ईनाम माँगा और सोचा कि अब इस बिटिया से क्या इनाम लेना ? पर गली में आया हूँ तो उससे मिल ही लूँ. उसने दरवाजा खटखटाया. अंदर से आवाज आई,"कौन?" पोस्टमैन ! उत्तर मिला. बालिका हाथ में एक गिफ्ट पैक लेकर आई और कहा, "अंकल,मेरी तरफ से दीपावली पर आपको यह भेंट है."

पोस्टमैन ने कहा, "तुम तो मेरे लिए बेटी के समान हो,तुमसे मैं गिफ्ट कैसे लूँ?"

कन्या ने आग्रह किया कि मेरी इस गिफ्ट के लिए मना नहीं करें."

ठीक है कहते हुए पोस्टमैन ने पैकेट ले लिया.

बालिका ने कहा,"अंकल इस पैकेट को घर ले जाकर खोलना. '

घर जाकर जब पोस्टमनने पैकेट खोला तो विस्मित रह गया, क्योंकि उसमें एक जोड़ी जूते थे. उसकी आँखें भर आई. अगले दिन वह ऑफिस पहुंचा और पोस्टमास्टर से फरियाद की कि उसका तबादला फ़ौरन कर दिया जाए.

पोस्टमास्टर ने कारण पूछा, तो पोस्टमैन ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखों और रुंधे कंठ से कहा, "आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूँगा. उस अपाहिज बच्ची ने तो मेरे नंगे पाँवों को तो जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊँगा?"

मित्रों, संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है. संवेदनशीलता यानि, दूसरों के दुःख-दर्द को समझना, अनुभव करना और उसके दुःख-दर्द में भागीदारी करना, उसमें शरीक होना. यह ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना इंसान अधूरा है.

ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमें संवेदनशीलता रूपी आभूषण प्रदान करें ताकि हम दूसरों के दुःख-दर्द को कम करने में योगदान कर सकें. संकट की घड़ी में कोई यह नहीं समझे कि वह अकेला है, अपितु उसे महसूस हो कि सारी मानवता उसके साथ है.....।

Must Read:



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9 December 2015

फैसला - Motivational Story In Hindi !

फैसला - Motivational Story In Hindi !

फैसला - Motivational Story In Hindi !
फैसला - Motivational Story In Hindi !

नमस्कार दोस्तों, जिंदगी के इस सफ़र में कुछ ऐसे पल आते हैं जब हमें कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने होते हैं और हम इसमें जल्दबाजी कर बैठते हैं बिना इसके परिणाम के बारे में सोचकर. और फिर हमें अपने किये हुए फैसले पर अफ़सोस करने के अलावे कुछ नहीं रह जाता.

अगर आप भी कोई फैसला जल्दबाजी में लेते हैं तो, जरा रुकिए ! सोचिये ! और तब अपने महत्वपूर्ण फैसले का निर्णय कीजिये.

हमारे जिन्दगी का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है हमारे Career का फैसला. हम सभी ऐसे मोड़ पर आ ही जाते हैं जब हमें सोचना होता है कि आगे क्या करना है, अपनी Life को किस ओर ले जाना है, या इसे ऐसे हीं कटी पतंग के जैसे छोड़ देना है ताकि ये इधर उधर भटकते रहे. मुझे विश्वास है कि आप अपने Life के साथ कुछ अच्छा करना चाहते होंगे और इसके लिए जरुरी है सही फैसला लेना.

आइये पढ़ते हैं एक Motivational Hindi Story with Moral !

एक पहलवान जैसा हट्टा-कट्टा, लंबा-चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर किसी शहर के स्टेशन पर उतरा. उसने एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे शिवजी के मंदिर जाना है, जो इस शहर में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. टैक्सी वाले ने कहा- 200 रुपये लगेंगे. उस पहलवान आदमी ने पहले तो उसे मनाया, लेकिन जब वह नहीं माना, तो अपनी बुद्धिमानी दिखाते हुए कहा- इतने पास में है मंदिर. मुझे उल्लू समझते हो? इतनी-सी दूर जाने के दो सौ रुपये कोई लेता है भला? आप टैक्सी वाले लोग तो लूट रहे हो आजकल. रहने दो, मैं अपना सामान खुद ही उठा कर चला जाऊंगा. इतना कह कर वह चल दिया.

वह व्यक्ति काफी दूर तक सामान लेकर चलता रहा. वह बहुत थक भी गया था. कुछ देर बाद फिर से उसे वही टैक्सी वाला दिखा, अब उस आदमी ने फिर टैक्सी वाले से पूछा- भैया, अब तो मैंने आधा से ज्यादा दूरी तय कर ली है, तो अब आप कितना रुपये लेंगे?

टैक्सी वाले ने जवाब दिया- 400 रुपये. उस आदमी ने फिर कहा- पहले दो सौ रुपये, अब चार सौ रुपये, ऐसा क्यों?

टैक्सी वाले ने जवाब दिया- महोदय, इतनी देर से आप शिव मंदिर की विपरीत दिशा में दौड़ लगा रहे हैं, जबकि शिव मंदिर तो दूसरी तरफ है. उस पहलवान व्यक्ति ने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप टैक्सी में बैठ गया.

इस पहलवान की तरह ही जिंदगी में कई बार हम किसी चीज को बिना गंभीरता से सोचे सीधे काम शुरू कर देते हैं और फिर अपनी मेहनत और समय को बरबाद कर उस काम को आधा ही करके छोड़ देते हैं. इसलिए बेहतर है कि किसी भी काम को हाथ में लेने से पहले हम पूरी तरह सोच विचार लें कि हम जो कर रहे हैं, वह हमारे लक्ष्य का हिस्सा है या नहीं?

एक बात हमेशा याद रखें कि दिशा सही होने पर ही मेहनत पूरी रंग लाती है और यदि दिशा ही गलत हो, तो आप कितनी भी मेहनत कर लो, कोई लाभ नहीं मिल पायेगा. इसलिए दिशा तय करें और आगे बढ़ें. कामयाबी आपका हाथ जरुर थामेगा.

अगर हम विद्यार्थी जीवन की बात करें तो कई छात्र कोई Subject बिना सोचे समझे इस लिए चुन लेते हैं क्योंकि उनका कोई दोस्त Same Subject चुना होता है. वो ये नहीं सोचते की हमारा इसमें Interest है या नहीं और बाद में वो हीं Subject जब समझ से बाहर हो जाता तो उनके पास पछतावा के सिवा कुछ नहीं रह जाता.

इस Hindi Story से हमें यहीं सिख मिलती है कि बिना सोच समझकर किया गया काम हमें सिर्फ और सिर्फ हानि पहुंचाता है.

अतः अंत में मैं यहीं कहना चाहूँगा कि कोई काम भी शुरू करने से पहले इसके बारे में गंभीरता से सोचें, कदम उठाने से पहले इसके बारे में सही गलत अच्छी तरह से जांच लें.


सही समय पर सोचकर लिया गया सही फैसला हमें सफल बनाता है !

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27 November 2015

Moral Hindi Story: कुछ तो लोग कहेंगे !


Moral Hindi Story: कुछ तो लोग कहेंगे !


नमस्कार दोस्तों, जैसा कि हमने पिछली Post"सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग - Inspirational Story in Hindi !" में जिक्र किया था कि आप जो कर हैं या करना चाहते हैं उसमे दुनिया को हस्तक्षेप न करने दें. ये आपका काम है और इसे अपने अनुसार करें न कि दुनिया के अनुसार. अगर आप इसे अपनी इच्छानुसार करेंगे तभी इसे Perfect कर पाएंगे. लोगों का क्या है वो तो तब भी कहेंगे जब आप कुछ अच्छा कर रहे होंगे क्योंकि "कुछ तो लोग कहेंगे"

सच ये है कि वे लोग जो खुद अपनी जिंदगी के साथ कुछ अच्छा नहीं कर रहे होते हैं वो सिर्फ दुसरे में कमियां निकालने में लगे रहते हैं. इसके विपरीत जो व्यक्ति सफल हैं या अपनी जिन्दगी के साथ कुछ अच्छा कर रहे होते हैं वो दूसरों को Encourage करते हैं, उनका उत्साह बढ़ाते हैं और इसे दिल से करने के लिए प्रेरित करते हैं न कि दुनिया को दिखाने के लिए.

निष्कर्ष यहाँ पर ये निकलता है कि जब हम अपनी जिंदगी में कोई बदलाब करते हैं तो सभी लोग जो हमसे परिचित होते हैं कुछ न कुछ कहते हैं. कुछ लोग हमारे उत्साह बढाने के लिए कहते हैं जबकि कुछ लोग उत्साह घटाने के लिए.

अब सवाल ये रह जाता है कि उनकी बातों में आकर अपना फैसला बदल लेते हैं या उनसे प्रेरित होकर अपने काम को पुरे दिल के साथ करते हैं?

इसे बताने कि जरुरत नहीं कि जो लोग दुनिया से अलग अपने आप को ज्यादा महत्व दिए तथा लोगों से प्रेरित होकर अपना काम किये वो आज उन लोगों कि अपेक्षा ज्यादा Successful हैं जो दुनिया की बातों में आकर अपना फैसला बदल लिए.

मुझे Social Media पर शेयर की जा रही Hindi Story काफी अच्छी लगी, सोचा कि इसे आप लोगों के साथ शेयर करना चाहिए.......

एक किसान और उसका बेटा उनके गधे को अपने गाँव से बाहर दूसरी जगह बेचने ले जा रहे थे. शुरुआत में वो दोनों पैदल चल रहे थे और गधा उनके साथ में चल रहा था. वो देखकर एक आदमी ने उसे बेटे को गधे पर बैठाने की सलाह दी. उस आदमी के कहे अनुसार उस किसान ने अपने बेटे को गधे पर बैठा दिया तथा खुद उसके साथ पैदल चलने लगा. कुछ दुरी तय करने के बाद एक और आदमी से उसकी मुलाकात हुई जो बेटे की आलोचना करते हुए कहा कि खुद हट्टा कट्ठा होकर गधे पर बैठे हुए हो और अपने बूढ़े बाप को पैदल चलवा रहे हो. लड़का ये सुनकर शर्मिंदा हो गया और गधे से उतरकर अपने पिता को गधे पर बैठाकर आगे का सफ़र शुरू किया.

इसी तरह और थोडा सफर करने के बाद उन्हें तीसरा आदमी मिला. उसने कहा की “लडके की चिन्ता न करके खुद गधे की तरह गधे पर बैठा है” वो आदमी किसान को गुस्से से बोला. उस किसान को भी बुरा लगा और वो गधे से निचे उतर गया. अब आगे क्या करना इसी सोच में वो रास्ते के किनारे में स्थित पेड़ के निचे बैठा. तभी वहां एक और आदमी आया. उस चौथे आदमी को अभी तक का अपना अनुभव बता कर आगे क्या करे इस विषय में किसान ने सलाह मांगी. इस पर उस चौथे आदमी ने बड़ी आसानी से किसान और उसके बेटे दोनों को गधे पर बैठ कर सफर करने की सलाह दी.

उसके बाद वो सफर पर चल पडे. कुछ समय के बाद उन्हें एक और आदमी मिला और उसने कहा “बाप - बेटा दोनों के गधे पर बैठने की वजह से उस गधे का क्या हाल हो रहा होगा” उस आदमी ने भी अपनी एक अलग सोच किसान के सामने रखी. एक बार फिर से किसान को बुरा लगा और वो पुनः अपने गधे के साथ दोनों पैदल चलने लगे.

इस कहानी से हमें यही सिख मिलती है कि अगर हम दुनिया के बातों में आकर युहीं फैसले बदलते रहेंगे तो कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाएंगे, और अगर पहुँच भी गए तो हमें भी वहीँ मिलेगा जो आज तक लोगों को मिलता आया है, यानि कुछ भी अलग नहीं.

हमारे पास इस सुन्दर जीवन का सिर्फ एक ही मौका होता है और इसे भी दुसरे के अनुसार जीने में व्यर्थ कर देंगे तो धरती पर हमारा जीने का मकसद बेकार जायेगा.

अतः दोस्तों मैं आपलोगों से यही कहना चाहूँगा कि वास्तव में आप इस दुनिया में कुछ अलग करना चाहते हैं तो सिर्फ और सिर्फ अपने दिल के सुनें. क्योंकि आप कभी भी अपने आप को धोखा नहीं दे सकते.

वो कहते हैं न सुनो सबकी, करो मन की.

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14 November 2015

अभी दूर तक जाना है- Motivational Hindi Story !

Inspirational Story in Hindi

नमस्कार दोस्तों,

मैं प्रकाश एक बार फिर से उपस्थित हूँ जीवन के एक बहुत बड़ी सिख लेकर. हम किसी परिस्थिति के सापेक्ष कैसा Behave करते हैं ये बहुत मायने रखता है. इसी से सम्बंधित एक बहुत हीं Motivational Hindi Story बताने जा रहा हूँ. आशा है आप इसे पसंद करेंगे.

एक Couple (युगल) की शादी को बहुत दिन हो चुके थे पर उनका कोई अपना संतान नहीं था. फिर भी वे एक दुसरे को बहुत प्यार करते थे. ईश्वर की कृपा से 11 साल बाद उनको एक लड़का प्राप्त हुआ. वे दोनों उसे बहुत चाहते थे. वो लड़का उस युगल की आँखों का तारा था.

एक सुबह, जब वह लड़का तक़रीबन 2 साल का था, पति (लड़के के पिता) ने देखा कि एक दवाई की बोतल खुली हुई है. उसे काम पर जाने के लिए देरी हो रही थी इसलिए उसने अपनी पत्नी से उस बोतल को ढक्कन लगाने और अलमारी में रखने को कहा. लड़के की मम्मी रसोईघर में काम करने में तल्लिन थी, वो ये बात पूरी तरह से भूल गयी थी.

लड़के ने खेलने के क्रम में उस बोतल को देखा और खेलने के इरादे से उस बोतल की ओर गया, बोतल के कलर ने उसे मोह लिया था इसलिए उसने उसमे रखी पूरी दवाई पि ली. उस दवाई की एक छोटी सी मात्रा भी बच्चे के लिए जहरीली हो सकती थी.

जब वह लड़का निचे गिरा, तब उसकी मम्मी उसे जल्द से जल्द दवाखाने ले गयी जहा उसकी मौत हो गयी. उसकी मम्मी पूरी तरह से हैरान हो गयी थी, वह भयभीत हो गयी थी, कि कैसे वो अब अपने पति का सामना करेंगी?

जब लड़के के परेशान पिता दवाखाने में आये तो उन्होंने अपने बेटे को मृत पाया और अपनी पत्नी और देखते हुए सिर्फ चार शब्द कहे.

आपको क्या लगता है कोनसे होंगे वो चार शब्द?

पति ने सिर्फ इतना ही कहा- “ I Love You Darling”.

उसके पति का अनअपेक्षित व्यवहार आश्चर्यचकित करने वाला था. उसका लड़का मर चूका था. वो उसे कभी वापिस नहीं ला सकते थे. और वो उसकी पत्नी में भी कोई कसूर नहीं ढूंड सकता था. इसके अलावा, अगर वो ही उस बोतल को बंद कर के सही जगह रख देता तो आज ये घटना नहीं होती.

वो किसी पर भी आरोप नहीं लगा सकता था. उसकी पत्नी ने भी अपना एकलौता बेटा खो दिया था. उस समय उसे सिर्फ अपने पति से सहानुभूति और दिलासा चाहिये थी. और यही उसके पति ने उस समय उसे दिया. और सबसे बड़ी बात अब उस चीज के बारे में सोचने या गुस्सा होने से क्या फायदा जिसे हम पा ही नहीं सकते. हमें अपनी जिन्दगी के आगे के बारे में सोचना चाहिए न कि जो बीत गया उसके बारे में.

कभी-कभी हम इसी में समय व्यर्थ कर देते है की परिस्थिती के लिए कौन जिम्मेदार है या कौन आरोपी है, ये सब हमारे आपसी रिश्तो में होता है, जहा जॉब करते है वहां या जिन लोगो को हम जानते है उन सभी के साथ होता है, और परिस्थिती के आवेश में आकर हम अपने रिश्तो को भूल जाते है और एक दुसरे का सहारा बनने के बजाये एक दुसरे पर आरोप लगाते है. 


कुछ भी हो जाये, हम उस व्यक्ति को कभी भी नहीं भूल सकते जिसे हम प्रेम करते है, इसीलिए जीवन में जो आसान है उसे प्रेम करो. आपके पास अभी जो है उसे जमा करो. और अपनी तकलीफों को विचार कर-कर के बढ़ाने के बजाये उन्हें भूल जाओ. उन सभी चीजो का सामना करो जो आपको अभी मुश्किल लगती है या जिनसे आपको डर लगता है सामना करने के बाद आप देखोंगे के वो चीजे उतनी मुश्किल नहीं है जितना की आप पहले सोच रहे थे. हमें परिस्थिती को समझकर ही लोगो के साथ व्यवहार करना चाहिये, और लोगो कठिन परिस्थितियों में उनका हमदर्द बनना चाहिये.

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6 November 2015

Moral Hindi Story: दो घड़े !

Two Pots - Moral Hindi Story !

Hindi Moral Story - Two Pots !

नमस्कार दोस्तों,

कहते हैं दोस्ती बराबरी बालों के साथ करनी चाहिए अर्थात उनके साथ जो आपके लेवल का हो; न तो आपसे ज्यादा और नं है कम.

इस वाक्य को बिलकुल चरितार्थ करता है ये  Hindi Story with Moral.

एक घड़ा मिट्टी का बना था, दूसरा पीतल का. दोनों नदी के किनारे रखे थे. इसी समय नदी में बाढ़ आ गई, बहाव में दोनों घड़े बहते चले. बहुत समय मिट्टी के घड़े ने अपने को पीतलवाले से काफी फासले पर रखना चाहा.

पीतलवाले घड़े ने कहा, ''तुम डरो नहीं दोस्त, मैं तुम्हें धक्के न लगाऊँगा.''

मिट्टीवाले घड़े ने जवाब दिया, ''तुम जान-बूझकर मुझे धक्के न लगाओगे, सही है; मगर बहाव की वजह से हम दोनों जरूर टकराएंगे. अगर ऐसा हुआ तो तुम्हारे बचाने पर भी मैं तुम्हारे धक्कों से न बच सकूँगा और मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे. इसलिए अच्छा है कि हम दोनों अलग-अलग रहें.''

इस Hindi Story with Moral से हमें यही शिक्षा मिलती है कि  जिससे तुम्हारा नुकसान हो रहा हो, उससे अलग ही रहना अच्छा है, चाहे वह उस समय के लिए तुम्हारा दोस्त भी क्यों न हो.

यही बात हमारे जीवन में भी विल्कुल परफेक्ट बैठती है. हमारा lifestyle एक अलग लेवल का होता है जबकि और लोगों का अलग. अगर हम अपने लेवल के लोगों के साथ दोस्ती करते हैं या रिश्ते बनाते है तो ये Smooth चलता रहता है और हमारे जीवन में खुशियाँ हीं खुशियाँ होती है.

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2 November 2015

हम बन्दर नहीं इंसान हैं - Inspirational Story in Hindi !

Monkey Vs Man - Moral Hindi Story !

Monkey Vs Man - Hindi Story

नमस्कार दोस्तों,
                            इस संसार में इंसान सबसे बुद्धिमान जीव माना जाता है. इंसान, जानवरों से बिलकुल अलग सोचने तथा समझने की एक अद्भुत शक्ति रखता है. शायद इसी शक्ति के कारण आज इंसान धरती पर राज करता है. लेकिन क्या वास्तव में इंसान अपनी इस शक्ति का सही सही उपयोग कर पाता है ?

इस बात को समझने के लिए मनोवैज्ञानिकों के द्वारा कुछ बंदरों पर एक अध्ययन किया गया जो इस प्रकार है >>>

एक बार कुछ बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में डाला गया और वहां पर एक सीढी लगाई गई. सीढी के ऊपरी भाग पर कुछ केले लटका दिए गए.

उन केलों को खाने के लिए एक बन्दर सीढी के पास पहुंचा.  जैसे ही वह बन्दर सीढी पर चढ़ने लगा, उस पर बहुत सारा ठंडा पानी गिरा दिया गया और उसके साथ-साथ बाकी बंदरों पर भी पानी गिरा दिया गया. पानी डालने पर वह बन्दर भाग कर एक कोने में चला गया.

थोड़ी देर बाद एक दूसरा बन्दर सीढी के पास पहुंचा. वह जैसे ही सीढी के ऊपर चढ़ने लगा, फिर से बन्दर पर ठंडा पानी गिरा दिया गया और इसकी सजा बाकि बंदरों को भी मिली और साथ-साथ दूसरे बंदरो पर भी ठंडा पानी गिरा दिया गया. ठन्डे पानी के कारण सारे बन्दर भाग कर एक कोने में चले गए.

यह प्रक्रिया चलती रही और जैसे ही कोई बन्दर सीढी पर केले खाने के लिए चढ़ता, उस पर और साथ-साथ बाकि बंदरों को इसकी सजा मिलती और उन पर ठंडा पानी डाल दिया जाता.

बहुत बार ठन्डे पानी की सजा मिलने पर बन्दर समझ गए कि अगर कोई भी उस सीढी पर चढ़ने की कोशिश करेगा तो इसकी सजा सभी को मिलेगी और उन सभी पर ठंडा पानी डाल दिया जाएगा.

अब जैसे ही कोई बन्दर सीढी के पास जाने की कोशिश करता तो बाकी सारे बन्दर उसकी पिटाई कर देते और उसे सीढी के पास जाने से रोक देते.

थोड़ी देर बाद उस बड़े से पिंजरे में से एक बन्दर को निकाल दिया गया और उसकी जगह एक नए बन्दर को डाला गया.

नए बन्दर की नजर केलों पर पड़ी.  नया बन्दर वहां की परिस्थिति के बारे में नहीं जानता था इसलिए वह केले खाने के लिए सीढी की तरफ भागा. जैसे ही वह बन्दर उस सीढी की तरफ भागा, बाकि सारे बंदरों ने उसकी पिटाई कर दी.

नया बन्दर यह समझ नहीं पा रहा था कि उसकी पिटाई क्यों हुई. लेकिन जोरदार पिटाई से डरकर उसने केले खाने का विचार छोड़ दिया.

अब फिर एक पुराने बन्दर को उस पिंजरे से निकाला गया और उसकी जगह एक नए बन्दर को पिंजरे में डाला गया. नया बन्दर बेचारा वहां की परिस्थिति को नहीं जनता था इसलिए वह केले खाने के लिए सीढी की तरफ जाने लगा और यह देखकर बाकी सारे बंदरों ने उसकी पिटाई कर दी. पिटाई करने वालों में पिछली बार आया नया बन्दर भी शामिल था जबकि उसे यह भी नहीं पता था कि यह पिटाई क्यों हो रही है.

यह प्रक्रिया चलती रही और एक-एक करके पुराने बंदरों की जगह नए बंदरों को पिंजरे में डाला जाने लगा. जैसे ही कोई नया बन्दर पिंजरे में आता और केले खाने के लिए सीढी के पास जाने लगता तो बाकी सारे बन्दर उसकी पिटाई कर देते.

अब पिंजरे में सारे नए बन्दर थे जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था. उनमें से किसी को यह नहीं पता था कि केले खाने के लिए सीढी के पास जाने वाले की पिटाई क्यों होती है लेकिन उन सबकी एक-एक बार पिटाई हो चुकी थी.

अब एक और बन्दर को पिंजरे में डाला गया और आश्चर्य कि फिर से वही हुआ. सारे बंदरों ने उस नए बन्दर को सीढी के पास जाने से रोक दिया और उसकी पिटाई कर दी जबकि पिटाई करने वालों में से किसी को भी यह नहीं पता था कि वह पिटाई क्यों कर रहे है.


हमारे जीवन में भी कुछ ऐसा हीं होता है. हम आज भी अंधविश्वास और कुप्रथा से दूर नहीं हो पायें हैं जो हमारे जीवन में असफलता का एक बहुत बड़ा बाधक है. आज भी हम अन्धविश्वास को अन्दर बैठाएं हुए हैं जिसका आज कोई अस्तित्व नहीं है. सिर्फ समाज तथा लोगों के डर से इसी धारणा में बंधे हुए हैं.

जैसे सर्कस के हाथी को बचपन से ही रस्सी में बांध दिया जाता है और उसे वो जीवन भर नहीं तोड़ पाता है क्योंकि वो सोचता है कि हम इसको नहीं तोड़ सकते जबकि आज उसके पास इतनी शक्ति है कि ऐसे हजार रस्सियों को तोड़ सके !

आज हम कोई भी काम अपने मन का नहीं कर पाते हैं क्योंकि बचपन से हीं हमारे अन्दर Govt. जॉब करने का सपना बांध दिया जाता है क्योंकि सभी को लगता है कि Govt. जॉब के बाद जिन्दगी बेहतर हो जाती है, जबकि हम अपना मनपसंद काम करके उससे लाख गुना अच्छी जिन्दगी जी सकते हैं.

तो जरुरत है हम सभी को अपने उन पुराने विचारों से दूर होने का जो हमें सफल होने से रोकती है क्योंकि "हम बन्दर नहीं इन्सान हैं"


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27 October 2015

Hindi Story हर चुनौती में एक बड़ा अवसर छिपा होता है !

Hindi Story हर चुनौती में एक बड़ा अवसर छिपा होता है !

नमस्कार दोस्तों, 

                      आपके पास अगर कोई चुनौती आती है तो आप क्या करते हैं? क्या आप चुनौती को स्वीकार करते हैं या उससे दूर भागने की कोशिश करते हैं? अगर आप उसे स्वीकार करते हैं तब आप सफलता की ओर हैं. अगर आप उससे दूर भागने की कोशिश करते हैं तो अपनी आदत को बदल लें. क्योकि चुनौती हमें परखने के लिए आती है, वो हमारी सहनशक्ति देखना चाहती है. और जब हम उसे स्वीकार कर उससे पार पा लेते हैं तो वो हमारे लिए सफलता के नए दरवाजे खोल देता है. 


इसी से सम्बंधित आज आपको एक कहानी बताने जा रहा हूँ >>>

बहुत पुरानी बात है, किसी राज्य में एक राजा हुआ करता था. राजा ने एक बार अपने राज्य के लोगों की परीक्षा लेनी चाही. एक दिन उसने क्या किया कि सुबह सुबह जाकर रास्ते में एक बड़ा सा पत्थर रखवा दिया. अब तो सड़क से जो कोई भी निकलता उसे बड़ी परेशानी हो रही थी लेकिन कोई भी पत्थर हटाने की कोशिश नहीं कर रहा था.

राजा यह सब छुपकर देख रहा था, कुछ देर बाद उसके राज्य के मंत्री और अन्य बड़े बड़े और धनी लोग भी वहाँ आए लेकिन किसी ने भी पत्थर हटाने की कोशिश नहीं की बल्कि सभी राजा को ही गालियाँ दे रहे थे कि रास्ते में इतना बड़ा पत्थर पड़ा है और राजा इसे हटवा क्यूँ नहीं रहा है.

कुछ देर बाद वहाँ एक ग़रीब किसान आया जिसके सर पे बड़ा सा सब्जी का गट्ठर रखा हुआ था जब वह पत्थर से गुज़रा तो उसे वजन की वजह से काफ़ी परेशानी हो रही थी. तो उसने अपने सर से सब्जी की गठरी उतारी और पत्थर को पूरी ताक़त से हटाने में जुट गया. वो पत्थर बहुत बड़ा था लेकिन किसान ने हार नहीं मानी और कुछ ही देर में रास्ते से पत्थर हटा दिया. जैसे ही वो वहाँ से चला उसने देखा की पत्थर वाली जगह पर एक थैला पड़ा हुआ था जो कि राजा ने पत्थर के नीचे छुपा दिया था. 

किसान ने थैला खोला तो देखा उसमें सोने के 1000 सिक्के थे और एक पत्र था जिसमें लिखा था-“पत्थर हटाने वाले को राजा की ओर से इनाम” अब तो किसान फूला नहीं समा रहा था|

तो दोस्तों इसी तरह से जीवन में आने वाली हर परेशानी भी एक अच्छा अवसर लेकर आती है जो लोग नकारात्मक सोचते हैं वो इसे समझ नहीं पाते और अवसर खो देते हैं वहीं सकारात्मक सोच के व्यक्ति चुनौती स्वीकार करते हैं और अवसर का लाभ उठाते हैं. और चुनौती कभी धोखा नहीं देती.

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23 October 2015

Be Happy, Not Sad !

नमस्कार दोस्तों,

                         "बिल गेट्स" जो Microsoft के मालिक हैं कहते हैं कि "किसी के साथ भी अपनी तुलना न करें, और अगर आप ऐसा करते हैं तो अपने आप का अपमान करते हैं". उनकी शब्दों में वास्तविकता है तभी तो आज वे दुनिया के नंबर 1 Operating System Microsoft window के मालिक हैं. वे बताते हैं कि वे परीक्षा में कुछ Subjects में fail कर गए जबकि उनके दोस्त सभी Subjects में पास कर गए, आज उनका दोस्त Microsoft में Engineer है और वे इसके मालिक. दरअसल सच ये है कि हम जिस परिस्थिति में होते हैं उसमें हमेशा कुछ बदलाब चाहते हैं, हम अपने स्थिति से हमेशा दुखी रहते हैं. सोचते हैं कि हमारी जिन्दगी उसकी जैसे क्यों नहीं है जबकि वो भी यही सोच रहा होता है कि हमारी जिन्दगी उसकी जैसी क्यों नहीं है.


आइये पढ़ते हैं एक कहानी >>>

एक बार एक जंगल में एक कौवा था. वह कौवा अपने रंग से काफी दुखी था. उसे लगता था कि दूसरे पक्षियों के सामने वह बहुत काला है. उसे खुद के रंग से बहुत दुःख होता था। और हमेशा अंदर से उदास रहने लगा था.

एक दिन वह जंगल में उड़ रहा था कि उसने नीचे देखा कि पानी में एक बत्तख तैर रहा था.
वह कौवा बत्तख के पास गया और बोला "तुम कितने सफ़ेद हो। तुम तो दुनिया के बहुत खुशनसीब पक्षी हो."

कोवे की बात सुनके बतख ने जवाब दिया "हाँ हूँ तो मैं बहुत सुन्दर। परन्तु जब भी मैं तोते को देखता हूँ तो मुझे अपने आप पे गुस्सा आता है. क्यूंकि मैं तो पूरा सफ़ेद हूँ जबकि तोता तो लाल और हरे रंग का होता है"

बतख की ये बात सुनके कौवा तोते के पास गया और कहा "तुम इस दुनिया के सबसे सुन्दर और खुशनसीब पक्षी हो, तुम्हे तो अपने आप पे बहुत गर्व होता होगा"

कौवे की बात सुनकर तोते ने जवाब दिया "मुझे तब तक अच्छा लगता है जब तक मैं मोर को नहीं देख लेता. क्यूँकि मैं जब भी मोर को देखता हूँ, मुझे बहुत जलन और दुःख होता है मेरे पास सिर्फ दो ही रंग हैं जबकि मोर के पास इतने सारे रंग हैं. इतने सारे रंगों में मोर बहुत ही सुन्दर दिखता है"

कौवे को लगा बात तो तोते ने बिलकुल सही कही है. मोर तो सच में बहुत सुन्दर होता है.

और फिर वह कौवा एक चिड़ियाघर गया। जैसे ही वह वहाँ पहुँचा उसने देखा कि मोर को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो रखी है कोई मोर को निहार रहा है और कोई मोर की फोटो खींच रहा है.

लोगों के जाने के बाद कौवा मोर के पास गया और मोर की तारीफ करके कहा "तुम इस दुनिया के सबसे सुन्दर पक्षी हो. तुम्हे अपने आप को देखके कितनी ख़ुशी होती होगी। सब तुम्हारी इतनी तारीफ करते हैं"

कौवे की यह बात सुनकर मोर ने बड़े विनम्र शब्दों में उत्तर दिया. "मैं इस दुनिया का सबसे खूबसूरत पक्षी हूँ, इसी खूबसूरती के कारण मैं इस चिड़ियाघर में कैद हूँ, क्यूंकि सब लोग मुझे देखना चाहते हैं और मुझे देखने इस चिड़ियाघर में आते हैं इसलिए मेरी यहाँ बहुत ज्यादा देखभाल की जाती है. जिससे मैं अपनी मर्ज़ी से कहीं आ जा नहीं सकता. और मुझे यह एहसास हुआ कि कौवे को कभी ऐसे कैद करके नहीं रखा जाता इसलिए मुझे हमेशा यह लगता हैं काश मैं कौवा होता. तो आज एक खुले आसमान में घूमता जहाँ मन करता आ जा सकता था "

मोर की बात सुनके कौवा चुपचाप चला गया क्यूंकि उसे अब यह एहसास हो गया था कि सिर्फ वही नहीं बल्कि सभी दुखी हैं.

हमें इस कहानी से यही सिख मिलती है कि हम हमेशा अपनी जिंदगी से कुछ ज्यादा मिलने की इच्छा रखते हैं. लेकिन हमारे जीवन में ख़ुशी का इससे कोई संबंध नहीं है. इश्वर ने हमें जो कुछ भी दिया बहुत सोच समझ कर दिया है. वो हमें ये नहीं देता जो हमें अच्छा लगता है जबकि वो हमें ये देता है जो हमारे लिए अच्छा होता है. हम बरबस हीं अपनी जिन्दगी की तुलना दुसरे से करके दुखी होते रहते हैं.

इसलिए आपके पास जो कुछ भी है उसका पूर्ण आनंद उठायें और जो नहीं है उसके बारे सोच कर दुखी होने से कोई फायदा नहीं है. इस जीवन में कुछ चीजे तो हैं जिसे हम परिश्रम से पा सकते हैं लेकिन कुछ ऐसी भी है जिसे हम चाह कर भी नहीं पा सकते क्योंकि वो हमारे लिए नहीं बनी होती है.

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17 October 2015

सकारात्मक सोच की शक्ति !

Power of Positive Thoughts in Hindi 

नमस्कार दोस्तों,

                       "Power of Positive Thoughts in Hindi" हम हमेशा एक कहावत सुनते हैं, जैसा हम सोचते हैं वैसा ही हम बन जाते हैं. ये कहावत पूरी तरह से सही हैं, क्योकि हमारा Mind एक वक्त में एक ही विचार कर सकता हैं Negative या Positive !


आपलोग हमेशा सुनते होंगे, हमें positive सोच रखनी चाहिए negative नहीं. क्या है ये positive और negative विचार ?

दुनिया में हो रही घटनाओं को देखने का हम सभी का अपना अलग अलग नजरिया होता है. कुछ लोग इसे negative रूप में देखते हैं, अर्थात हमेशा कुछ न कुछ कमी निकालते रहते हैं जब कि कुछ लोग उसी घटना को positive रूप में देखते हैं और उसमे ये खोजते है कि इसमें क्या अच्छाई है, और उसी अच्छाई से सिख लेकर नित अपना जीवन सफल बनाते चले जाते हैं. वास्तव में हमारे जीवन में जो होता हैं अच्छे के लिए होता है. हमें कुछ समय के लिए उस घटना से दुःख जरुर होता है लेकिन बाद में यही पता चलता है कि ये हमारे लिए अच्छा ही हुआ.

आइये पढ़ते हैं एक कहानी >>>

एक ऋषि के दो शिष्य थे जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था. एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये.
जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे. ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो. फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है.

शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है. इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए. फिर दूसरे शिष्य से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा.

इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए. गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बडाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा. सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है. नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीज़ों मे भी बुराई ही ढूंढते हैं.

उदाहरण के लिए:- गुलाब के फूल को काँटों से घिरा देखकर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है की “इस फूल की इतनी खूबसूरती का क्या फ़ायदा इतना सुंदर होने पर भी ये काँटों से घिरा है ” जबकि उसी फूल को देखकर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है की “वाह! प्रकृति का कितना सुंदर कार्य है की इतने काँटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया” बात एक ही है लेकिन फ़र्क है केवल सोच का.

तो दोस्तों, अब ये हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दुखों को देखकर और दुखी होते चले जाएँ ये इससे सिख लेकर अपने जीवन को एक नयी दिशा में ले जाएँ. प्रकृति का ये नियम है कि आप जितना संघर्ष करोगे आपके सफलता का प्रतिशत उतना ही अधिक होगा. इसलिए संघर्ष करना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिसा इससे भागे नहीं बल्क़ि इसे अपना दोस्त बना लें.

आप जब चाहे Negative Thinking को Positive Thinking में बदल सकते हैं. यदि आप Positive Thinking को पुरे निश्चय के साथ कई बार दोहराए की मुझे इस काम से डर नहीं लगता या कोई आशंका नहीं हैं मैं इसे बहुत अच्छे से पूरा करुगा या मेरा ये काम अवश्य सिद्ध होगा, तो आप निश्चत ही अपने काम में सफल हो जाऐगे.

अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि कोई परिस्थिति कितनी भी बुरी क्यों न हो हमें उसे सकरात्मक नजरिये से देखना चाहिए क्योंकि ये हमारे जीवन को सफल बना सकता है, हमें इसकी power को अनदेखा नहीं करनी चाहिए.

जरुर पढ़ें >>>


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15 October 2015

सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग - Inspirational Story in Hindi !

नमस्कार दोस्तों,

                           "सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग" - ये सिर्फ एक वाक्य नहीं वल्कि एक वास्तविकता है. चलिए मान लेते हैं कि आप एक College's Student हैं. सीधी सी बात है आपसे सभी लोग सिर्फ पढाई के बारे में बात करेंगे और सोचेंगे कि भविष्य में ये या तो Doctor, Engineer, Teacher, Officer या फिर कोई और बड़ा अधिकारी बनेगा. अब मान लीजिये की आपको Painter बनना है क्योंकि की ये करना आपको पसंद है. लेकिन आप लोगो को ये नहीं बता सकते क्योंकि आप सोचेंगे कि वो क्या कहेंगे कि एक अच्छे घर का लड़का जो कि एक अच्छे कॉलेज में पढ़ रहा है वो कोई Officer न बन कर एक Painter बनना चाहता है.



अब मान लीजिये की आप किसी तरह किसी को बता भी देते हैं तो वे सबसे पहले सोचेंगे कि ये क्या कह रहा है फिर इस काम (Painting) से सम्बंधित आपको कमियां बताएँगे. वो आपको बताएँगे कि ये कितना छोटा काम है जो कुछ गिने चुने लोग करते हैं. और आप कोई Officer बनकर किस तरह अफसरशाही की जिन्दगी जी सकते हो.

अब बात ये रह जाती है कि आपका मन भी सोचने लगेगा की दुसरे क्षेत्र में risk क्यों लिया जाय जबकि हम जो कर रहे उसमे एक अच्छी जिन्दगी हो सकती है.

अब आप सोचो कि क्या आप Officer बनकर खुश रह पाओगे? हाँ आप दुनिया की नजर में एक अच्छे आदमी बन जाओगे लेकिन आप खुश नहीं रह पाओगे क्योंकि ये आपके interest area में नहीं है. आप अपने life से उब जाओगे और ये life आपको सिर्फ बोझ लगने लग जाएगी जिसे आप जी नहीं बिता रहे होगे.

तो आखिर क्या कारण है की हमने अपना पसंदीदा काम न करकर एक Officer बन गए. इसका मुख्य कारण था हमारा डर कि "लोग क्या कहेंगे" वो क्या सोचेंगे. और उन सब के कारण आपने अपनी जिन्दगी बर्बाद कर ली; एक ऐसे काम को कर रहे हैं जिसमे आपका कोई interest नहीं है.

उडान से संबधीत सभी नियमो के अनुसार मधुमखियो में उड़ने की क्षमता ही नहीं है, उनके पंख इतने छोटे हैं कि वो उनके भारी शरीर का वजन उठा ही नहीं सकते बावजूद इसके मधुमख्खिया उडती हैं क्योंकि, मधुमख्खियो को इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता की इन्सान क्या सोचता हैं.

इस कहावत से यही बात सामने आती हैं कि मधुम्ख्खियो को या किसी भी जानवर को इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके बारे मे इन्सान या कोई और क्या सोचते हैं, पर इन्सान की एक यही आदत सभी समस्याओ की जड़ हैं. हमारी सोच कि लोग क्या कहेगे, लोग क्या सोचेगे, उनको क्या लगेगा इसी सोच की वजह से हम कुछ भी खुलकर और Confidence के साथ नहीं कर पाते. क्योकि हम कोई भी काम करने से पहले दस बार लोगों के बारे में सोचते हैं और अगर हम कोई काम करेगे और इसमें हम कामयाब नहीं हो पाये तो मेरे दोस्त, रिश्तेदार, पडोसी, मेरे पहचानवाले मेरे बारे मे क्या सोचेगे इस डर की वजह से हम कोई भी काम करने से कतराते हैं. लेकिन जिंदगी मैं अगर कुछ बड़ा काम करना है तो लोगो के बारे मैं सोचना छोड़ देना होगा.

चलिए एक छोटी कहानी पढ़ते हैं >

एक दिन एक आदमी Morning Walk को गया तभी उसने एक गली में एक लड़के को कचरा उठाते हुये देखा वहां के दो-चार कुत्ते उस पर भौंक रहे थे उस आदमी ने उस लड्के की एक बात गौर की कि वो भौंकते हुये कुत्तो को देखकर उस लड़के के चेहरे पर न कोई डर था और न हीं उस लड़के का उन कुत्तो पर कोई ध्यान था वह लड़का बस अपना कचरा उठाने का काम कर रहा था. वो लड़का वहां से दूसरी गली में गया तो दूसरी गली के कुत्ते भी उसे देखकर भौकने लगे वहां पर भी उस लड़के ने कुत्तो की तरफ ध्यान न देकर अपना कचरा उठाने के काम को करता रहा. उस लड़के ने कचरा उठाकर दो-चार सौ रूपये कमा लिये और भौंकने वाले भौंकते रहे गये.

तो दोस्तों, यहीं सोच हम हमारी जिंदगी में अपनाये तो हम कभी पिछे नहीं रहगे. और हम अपना काम लोगो की सोच को ध्यान में रखकर नहीं करेंगे तो उसे सही तरीके से करेंगे.

वो कहावत हैं न ”सुनो सब की करो मन की ”

तो अब आप क्या सोचते हैं आप Painter बनना पसंद करोगे या Officer ? मैं सोचता हूँ कि आप जरुर Painter बनना चाहोगे क्योंकि यही वो काम है जिसे करने के लिए आप इस दुनिया में आये हो. और लोगों का क्या है ये तब भी आपको रोकेंगे जब आप कोई अच्छा काम करते रहोगे क्योकि इनका काम ही है कहना. और आप किसी भी सफल आदमी का उदाहरण लेकर देख लो क्या उन्होंने लोगों की बात सुनी या अपने दिल की ? वास्तव में अपनी दिल की क्योंकि अगर वो लोगों के अनुसार काम कर रहे होते तो आज उन्हें कोई नहीं जानता.

एक और नजदीकी उदहारण लेते हैं - "महेंद्रसिंह धोनी" इन्हें कौन नहीं जानता ! भारतीय क्रिकेट के सफलतम कप्तान तथा एक अच्छे Match Finisher के रूप में प्रसिद्ध हैं. India vs SA का पहला One Day मैच लेकिन उसमे धोनी का बल्ला नहीं चला; चारों तरफ लोग उनकी आलोचना कर रहे थे अब पता नहीं उन्हें इस बात से कोई फर्क पड़ा या नहीं, लोग तो यहाँ तक कह रहे थे कि अब उन्हें टीम से बाहर हो जाना चाहिए. फिर India vs SA का दूसरा One Day मैच जिसके जितने के एक मात्र कारण धोनी थे. अब वहीँ लोग जो उनकी आलोचना करते हुए नहीं थक रहे थे अब उनकी बड़ाई करते हुए नहीं थक रहे हैं. (Mostly on the Social Media)

इससे हमें सीख मिली की जब आप अच्छा करोगे तब भी आपको लोग कहेंगे और जब आपसे कुछ गलत हो जायेगा तब भी आपको कुछ कहेंगे. क्योंकि उनका काम ही है कहना. बस आप अपना काम करते जाओ वशर्ते आपको ये मालूम होना चाहिए कि आप अच्छा कर रहे हैं.

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Note - अगर आपके पास हिंदी में कोई story है जो लोगों में सकारात्मकता फैला सकती है तो इस Blog पर Share करने के लिए इसे हमारे ईमेलः jeevandarpan2015@gmail.com पर जरुर भेजें. इसे हम JeevanDarpan.Com पर आपके नाम तथा फोटो के साथ Publish करेंगे. धन्यबाद.
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12 October 2015

अपने रंग में दुनिया को रंग दें - Inspirational Story in Hindi !

नमस्कार दोस्तों,

हमारे जीवन में अलग अलग परिस्थितियां आती रहती है कुछ कठिन तो कुछ सरल. सरल बाले में तो हमें पता भी नहीं चलता कि हम कैसे इससे उबर गए पर जैसे ही कठिन परिस्थिति की बात आती है हम हार मानने लग जाते हैं. हमें प्रतिदिन इन सब का सामना करना पड़ता है अब हमारे पास option ये होता है कि या तो इसे अपना साथी बना लें या इससे डर कर भाग जाएँ. अगर आप भागोगे तो कब तक ? एक से निकलोगे दुसरे में अटक जाओगे. तो क्यों न कठिन परिस्थितियों का डट कर मुकाबला किया जाये और इसे अपना दोस्त बना लिया जाये. तभी तो कहते हैं सब कुछ आसान है.



आइये पढ़ते हैं एक कहानी ...........

अपने रंग में दुनिया को रंग दें - Inspiratioanl Story in Hindi !


एक बार किसी जगह पर एक पिता अपनी बेटी के साथ रहता था. दोनों में काफी प्यार था और दोनों काफी मिलजुलकर रहते थे. एक दिन बेटी ने अपने पिता से शिकायत करने लगी कि उसकी ज़िन्दगी बहुत ही उलझी हुयी है. और कहने लगी "मैं बहुत थक गयी हूँ अपनी ज़िन्दगी से लड़ते-लड़ते. जब भी कोई एक परेशानी खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है. कब तक लड़ती रहूंगी इन सब से." वह काफी परेशान लग रह रही थी.

यह सब सुनके पिता ने कहा मेरे साथ आओ, और रसोई में चले गए. बेटी भी अपने पिता के कहे अनुसार रसोई में अपने पिता के सामने खड़ी हो गयी. उसके पिता ने बिना कुछ कहे तीन बर्तनों में पानी भरकर अलग अलग चुल्हों पर उबालने रख दिया. एक बर्तन में आलू, एक में अण्डे और एक में coffee bean के टुकड़े डाल दिए. और बिना कुछ कहे बैठ के बरतनों को देखने लगे.

20 मिनट के बाद उसने चुल्हे बंद कर दिए. एक प्लेट में आलू, एक में अण्डे और एक कप में कॉफ़ी रख दी. और अपनी बेटी की तरफ घूमकर पूछा - तुमने क्या देखा?

बेटी ने हंसकर जवाब - आलू, अण्डे और कॉफ़ी.
पिता ने कहा - और नज़दीक से छूकर देखो.
बेटी ने आलू छूकर देखे तो महसूस किया वो काफी नरम हो चुके थे.
पिता ने फिर कहा - अब अंडे को छीलकर देखो.
बेटी ने वैसा ही किया और देखा अंदर से भी अण्डे सख्त हो चुके थे.
आखिर में पिता ने कॉफ़ी कप पकड़ाते हुए कहा अब इसे पियो.
बेटी ने कॉफ़ी पी और कॉफ़ी की इतनी प्यारी महक से उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी.

उसने बड़े उत्सुकता के अपने पिता से पूछा - इन सब चीज़ों का क्या मतलब है?

इसपर उसके पिता ने समझाया. आलू, अण्डे और कॉफ़ी तीनो एक ही परिस्थिति से गुजरे थे, तीनों को एक जैसे ही उबाला था. परन्तु जब बाहर निकाला तो तीनों की प्रतिक्रिया अलग-अलग थी. 

जब हमने आलू को उबालने रखा था तो वो बहुत सख्त था परन्तु उबालने के बाद वो नरम हो गया.

जब अण्डे को रखा था तब वो अन्दर से पानी की तरह तरल था परन्तु उबालते ही सख्त हो गया.

उसी तरह जब कॉफ़ी के दानों को डाला था तब वो सब अलग-अलग थे मगर उबालते ही सब आपस में घुल गए और पानी को भी अपने रंग में रंग दिया.

ठीक इसी तरह ज़िन्दगी में भी अलग-अलग परिस्थितियां आती है. जब आपको खुद ही फैसला करना होता है कि आपको किस परिस्थिति को कैसे सम्भालना है.

वास्तव में जब कठिनाई हमारी है तो इसका हल भी हमारा होना चाहिए. लेकिन जैसे ही हम प्रतिकूल स्थिति में आते हैं अपना धैर्य खो चुकते हैं और बाद में ये हमें इतना कठिन लगने लगता है जैसे यह असंभव हो. सच तो ये कि न तो यहाँ कुछ आसान होता है और न कठिन. ये हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम उसे आसान मानते हैं या कठिन. 

जिस चीज को आप कठिन मानोगे वो आपके लिए और कठिन होता चला जायेगा. और जिस चीज को आप आसान मानोगे वो आपके लिए आसान होता चला जायेगा.

बस एक शब्द याद रखिये Everything is "आसान है"

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आपका दोस्त,
प्रकाश कुमार निराला 


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9 October 2015

जिन्दगी का एक सच - Motivational Post in Hindi !

नमस्कार दोस्तों,
                         आज मैं आप लोगो को जिन्दगी के एक ऐसे सच के बारे में बताने रहा हूँ जो लगभग हम सभी के जिन्दगी से सम्बन्ध रखती है. हम अपनी जिन्दगी के कुछ अहम पहलु को खोते जा रहे हैं, हर कोई सिर्फ भौतिक साधन जुटाने में लगा हुआ है. और अपनी इस महत्वपूर्ण जिन्दगी को यूँ ही व्यर्थ कर रहे हैं. हम भूल जाते हैं कि हमारे पास एक सुन्दर परिवार है. 


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8 October 2015

नकारात्मकता से दूर - Inspirational Story in Hindi !

नमस्कार दोस्तों,

                        नकारात्मकता से दूर- Inspirational Story in Hindi ! ये life दोनों तरह के लोगों ( Positive और Negative ) से भरी पड़ी है. अब हम पर ये निर्भर करता है कि हम किनके साथ रहना चाहते हैं और उनसे सीखना चाहते हैं. प्रकृति का ये नियम है कि आप जैसे लोगों के साथ रहोगे आपके मन में वैसा ही विचार आएगा. और परिणामस्वरूप आप वैसा ही बन जाओगे.



ऐसा भी नहीं की हम अपने आप को पूरी तरह Negative से दूर कर सकते हैं क्योंकि हम एक सामाजिक प्राणी हैं जो एक दुसरे के साथ मिल जुलकर रहना जानते हैं. इस परिस्थिति में हम कैसे Positive को अपना सकते हैं. पहला तो आप बाहर के लोगों से Positive या Negative बनते हो. तथा दूसरा आप अपने अन्दर के environment के कारण, यानि कि आप जैसा अपने बारे में सोचोगे वैसा बनोगे.




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4 October 2015

जिन्दगी चलती रहती है - Inspirational Story in Hindi !

नमस्कार दोस्तों,

हमारी जिन्दगी न तो पूरी तरह आसान है और न ही इतना मुश्किल जितना हम मानते हैं. सच ये है कि जैसा हम इसे मानते हैं वैसा बन जाता है. अगर हम इस आसान मानते हैं तो ये धीरे धीरे आसान होता चला जाता है और अगर हम इसे मुश्किल मानते हैं तो ये धीरे धीरे और मुश्किल होता चला जाता है. तो आइखिर क्या कारण है कि हम ये जानते हुए भी ऐसा नहीं करते इसका एक कारण है है डर, अपना डर, Family का डर, लोगो का डर ये सारी चीजे हमें अपने आप की जिन्दगी से दूर करती चली जाती है और हम इस धरती पर सिर्फ समय बर्बाद कर रहे होते हैं.

और जो लोग इस डर से अपने आप को दूर कर लेते हैं वो जीवन का सही आनंद उठा पाते हैं. उनकी जिन्दगी चलती रहती है, रूकती नहीं.

आइये पढ़ते हैं के कहानी ...............

                     
जब जूलियो 10 साल का था, तो उसका एक ही सपना था, अपने फेवरेट क्लब रियल मैड्रिड की ओर से फुटबॉल खेलना. वह दिन भर खेलता, प्रैक्टिस करता और धीरे-धीरे वह एक बहुत अच्छा गोलकीपर बन गया. 20 का होते-होते उसके बचपन का सपना हकीकत बनने के करीब पहुंच गया. उसे रियल मेड्रिड की तरफ से फुटबॉल खेलने के लिए साइन कर लिया गया.
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