पढ़ें एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी जो हमें एक बहुत बड़ी शिक्षा देती है. . . . . . . . . . .

एक बार एक तालाब में दो मेंढक रहते थे जिनमें से एक बहुत मोटा था और दूसरा पतला. सुबह सुबह जब वे खाने की तलाश में निकले थे अचानक वे दोनों एक दूध के बड़े बर्तन में गिर गये जिसके किनारे बहुत चिकने थे और इसी वजह से वो उसे निकल नहीं पा रहे थे.
दोनों काफ़ी देर तक दूध में तैरते रहे उन्हें लगा कि कोई इंसान आएगा और उनको वहाँ से निकाल देगा लेकिन घंटों तक वहाँ कोई नहीं आया अब तो उनकी जान निकली जा रही थी. मोटा मेढक जो अब पैर चलाते चलाते थक गया था बोला कि मेरे से अब तैरा नहीं जा रहा और कोई बचाने भी नहीं आ रहा है अब तो डूबने के अलावा और कोई चारा नहीं है. पतले वाले ने उसे थोडा ढाँढस बढ़ांते हुए कहा कि मित्र कुछ देर मेहनत से तैरते रहो ज़रूर कुछ देर बाद कोई ना कोई हल निकलेगा.
हम जब किसी काम को कठिनाईयों की वजह से छोड़ रहे होते हैं तो हमें ये नहीं मालूम होता है कि हम लक्ष्य के कितने करीब थे, और बाद में हमारे पास सिर्फ पछताबा रह जाता है.
अंत में यही कहूँगा कि "मन के हारे हार है और मन के जिते जित" अतः कभी भी हार न मानें !
आपको हमारा ये Post "मन के हारे हार है मन के जिते जित - Motivational Story in Hindi !" कैसा लगा जरुर बताएं.
धन्यवाद !
